November 2, 2019

श्री आनन्द त्रिपाठी जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामना

दैनिक जागरण बिहार, झारखंड और बंगाल के वरिष्ठ महाप्रबंधक श्री आनन्द त्रिपाठी के जन्मदिन पर उन्हें मेरी ओर से बधाई के साथ अर्पित है –

अच्छा भी हो सकता है

संयोग यह भी है कि 90 के दशक की यह गज़ल 93 में दैनिक जागरण में ही प्रकाशित है।
और आज मैं दैनिक जागरण के वरिष्ठ महाप्रबंधक श्री आनन्द त्रिपाठी जी को जन्मदिन की बधाई के साथ अर्पित कर रहा हूँ,

अच्छा भी हो सकता है

– हाथ मिला कोशिश कर भाई ऐसा भी हो सकता है।
– अपना आंगन मंदिर मस्जिद गिरजा भी हो सकता है।

– तुमसे मतलब नहीं है कोई लेकिन तुम भी दुआ करो,
– अरसे से बीमार पड़ोसी अच्‍छा भी हो सकता है।

– आंगन की दीवार उचक कर कभी उधर भी झांको तो,
– बिछड़ा भाई फिर मिलने को प्‍यासा भी हो सकता है।

– कुछ चित्रों को गैर समझकर कोई पुस्‍तक मत फाड़ो,
– पलट के पढ़ लो उसमें अपना मुखड़ा भी हो सकता है।

– सच कहता हूं नफरत की यह आग भरोसेमंद नहीं,
– कल इसका आहार तुम्‍हारा बच्‍चा भी हो सकता है।

– मत इतनी उम्‍मीद करो की जार जार रोना होवे,
– खून से सींचा आम फला तो खट्टा भी हो सकता है।

– बहुत बुरा है लोकतंत्र पर इतनी अच्‍छाई तो मानो,
– इस रस्ते पर चलकर प्‍यादा घोड़ा भी हो सकता है।

– इस माटी के धोधे को भी एक बार अवसर तो दो,
– गुल्ली डंडा खेलने वाला गामा भी हो सकता है।

– हर मौसम को खौफ समझकर दरवाजा मत बंद करो,
– आने वाला खुशियों का शहजादा भी हो सकता है।

धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव
सम्पादक
राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर – सन्सद में दो टूक
लोकबन्धु राजनारायण – विचार पथ एक
अभी उम्मीद ज़िन्दा है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *