September 7, 2020

राजनीति में ईमानदारी के पर्याय जमुना प्रसाद बोस नहीं रहे

ईश्वर श्री जमुना प्रसाद बोस जी की आत्मा को शांति दे और उन्हें अटेंडेन्ट की सुविधा भी नहीं देने वाले कोविड अस्पताल और डाक्टर को उनके किए की सज़ा

स्वतन्त्रता सेनानी, लोकतन्त्र सेनानी, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और सादगी के पर्याय उत्तरप्रदेश सरकार के पूर्व मन्त्री श्री जमुना प्रसाद बोस जी नहीं रहे। उनके इलाज के बारे में गाँधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट के अध्यक्ष समाजवादी योद्धा श्री राजनाथ शर्मा और उनके सहयोगी श्री पाटेश्वरी प्रसाद को कुछ भी बताना नियम विरुद्ध बताने वाले, उनके एक अटेंडेन्ट देने की भी जहमत नहीं उठाने वाले कोविड अस्पताल ने 7 सितम्बर को सायंकाल यह सबको बता दिया कि वह नहीं रहे। इसके लिए कोविड अस्पताल और सम्बंधित डाक्टर के प्रति सार्वजनिक रूप से आभार प्रकट कर रहा हूँ, अन्यथा इलाज की तरह वह यह जानकारी भी नहीं देते तो हम बूढ़े लोग उनका क्या बिगाड़ सकते हैं?

चार बार विधायक रहे, मन्त्री रहे श्री जमुना प्रसाद बोस जी बाँदा अस्पताल से यहाँ आए थे। वहां से उन्हें कोरोना निगेटिव के प्रमाण के साथ इलाज के लिए यहाँ रेफर किया गया था।

इलाज के लिए बोस जी के आने की सूचना गाँधी जयन्ती समारोह ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री राजनाथ शर्मा और उनके सहयोगी पाटेश्वरी प्रसाद को थी। शर्मा जी ने इस सूचना के आधार पर जगह जगह दस्तक दी कि स्वतन्त्रता सेनानी, लोकतन्त्र सेनानी श्री जमुना प्रसाद बोस का आते ही लोहिया में इलाज शुरू हो जाए।

सूबे के कई महत्वपूर्ण लोगों ने लोहिया अस्पताल के जिम्मेदार लोगों से इसके लिए आग्रह भी किया। उधर से आश्वासन भी था कि बोस जी के इलाज में कोई दिक्कत नहीं होगी लेकिन यह आश्वासन धरा रह गया। बोस जी को लोहिया की इमरजेंसी में दाखिला नहीं मिला। उन्हें निजी अस्पताल में जाना पड़ा जहाँ उन्हें दूसरे दिन कोरोना पाजिटिव बता दिया गया।

अब शुरू हुई यह मशक्कत कि कोरोना के मरीज के रूप में उनका कहाँ इलाज हो ? अब इसके लिए जगह जगह दस्तक। बहरहाल जिलाधिकारी और सीएमओ की कृपा से लोहिया अस्पताल के कोविड अस्पताल में बोस जी को स्थान मिल गया।
इलाज क्या हुआ? यह तो डाक्टर ही बता सकते हैं? इलाज के दौरान श्री राजनाथ शर्मा और श्री पाटेश्वरी प्रसाद को जो बोध हुआ, वह दुखद था, दुखद है और दुखद रहेगा।
बकौल श्री राजनाथ शर्मा, ” बार बार आग्रह के बाद भी 95 वे वर्ष के स्वतन्त्रता सेनानी, लोकतन्त्र सेनानी के साथ एक अटेंडेन्ट तक की सुविधा नहीं मिली। श्री पाटेश्वरी प्रसाद जी ने स्थिति के बारे में तहकीकात किया तो सम्बंधित डाक्टर ने कहा कि इलाज के बारे में वह कुछ नहीं बता सकते, यह नियम विरुद्ध है।

बहरहाल, डाक्टर साहब आपको इस नियमानुसार व्यवहार के लिए “बधाई” हो। लोहिया अस्पताल के इस कोविड अस्पताल को भी बोस जी को अटेंडेन्ट नहीं देने के लिए “बधाई”।

मैं जानता हूँ कि मेरे लिखने से कुछ नहीं होगा। फिर भी यह पोस्ट इसलिए लिख रहा हूँ कि आपको याद रहे कि आपने जमुना प्रसाद बोस जैसे महान आदमी के साथ क्या व्यवहार किया है?

आपको जानकारी के लिए बता दूँ श्री जमुना प्रसाद बोस आज़ाद हिंद फौज के योद्धा थे, श्री जमुना प्रसाद बाद लोकतन्त्र सेनानी थे, श्री जमुना प्रसाद बोस जैसे लोग धरती पर कभी कभी पैदा होते हैं। ऐसे लोग मरने के बाद भी ज़िन्दा रहते हैं।

आपकी नियमानुसार सूचना के अनुसार यह सच है कि अब श्री जमुना प्रसाद बोस जी का तन हम लोगों के बीच नहीं रहा लेकिन उनकी ईमानदारी, उनकी सादगी, देश और समाज के प्रति उनका समर्पण सदैव रहेगा।वह हमेशा रहेंगे सार्वजनिक जीवन में सादगी और ईमानदारी का सम्मान करने वालों के मन में।

खासतौर से नेता प्रतिपक्ष श्री रामगोविन्द चौधरी, लोकतन्त्र सेनानी कल्याण समिति के संरक्षक यशवन्त सिंह, समाजवादी चिन्तक प्रोफेसर राजकुमार जैन, समाजशास्त्र के अंतरराष्ट्रीय विद्वान प्रोफेसर आनन्द कुमार, पूर्व विधानपरिषद सदस्य विंध्यवासनी कुमार, पूर्व मन्त्री बादशाह सिंह, लोकबन्धु राजनारायण के लोग ट्रस्ट के अध्यक्ष शाहनवाज क़ादरी, लोकनायक जयप्रकाश नारायण ट्रस्ट के अध्यक्ष अनिल त्रिपाठी, समाजवादी सेनानी सर्वश्री द्विजेन्द्र कुमार मिश्र, शुभ्रांशु शेखर पांडेय, अजय शमसा, विजयबहादुर राय, विजय कुमार देवव्रत, पाटेश्वरी प्रसाद, रमेश यादव और हमारे जैसे लोगों के मन में वह सदैव जीवित रहेंगे, एक ईमानदार आदर्श नेता के रूप में।
वह जीवित रहेंगे, इसलिए उनकी याद भी आएगी और जब जब उनकी याद आएगी, तब तब तुम्हारे इस नियमानुसार वाले व्यवहार की चर्चा होगी, तब तब उन्हें एक अदद अटेंडेन्ट नहीं मुहैया कराए जाने की चर्चा होगी और लोग प्रार्थना करेंगे कि बोस जी के साथ आपने जो किया है, उसकी सजा आप को मिले, सरकार नहीं दे तो ईश्वर दे।
फिलहाल
केवल इतना ही कि
ईश्वर श्री जमुना प्रसाद बोस जी आत्मा को शांति और उनके परिजनों तथा चाहने वालों को यह दुःसह दुख सहने की शक्ति दे।
धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव
सम्पादक
राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर सन्सद में दो टूक
लोकबन्धु राजनारायण विचार पथ एक

अभी उम्मीद ज़िन्दा है

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *