September 1, 2020

जुर्माना स्वीकार है, सच के लिए साहेबां

जुर्माना स्वीकार है
सच के लिए साहेबां

फूलों का उपहार है,
सच के लिए साहेबां।
सजा एक त्योहार है,
सच के लिए साहेबां।

ख्वाइश है तो फाँसी,
अब सुकरात दे दो,
फाँसी भी श्रृंगार है,
सच के लिए साहेबां।

पता करो गुरु, शुक्र, रवि,
साथ शनिचर मंगल भी,
मरने को तैयार है,
सच के लिए साहेबां।

हम हों आप हों या हो,
कहीं का हिटलर, नीरो,
सच के आगे छार है,
सच के लिए साहेबां।

जबतक हम इस पार हैं,
सच के साथ खड़े हैं,
कल जाना उस पार है,
सच के लिए साहेबां।

जय प्रशांत भूषण की,
सच की, न्यायालय की,
जुर्माना स्वीकार है,
सच के लिए साहेबां।

हम अनुयाई लोहिया,
जेपी, गान्धी के हैं,
अपना सच हथियार है,
सच के लिए साहेबां।

धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव
सम्पादक
राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर सन्सद में दो टूक
लोकबन्धु राजनारायण विचार पथ एक
अभी उम्मीद ज़िन्दा है

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