September 16, 2020

जय बोल फावड़ा, जेल, वोट, जीने खातिर लड़ना होगा

फिर इंकलाब कहना होगा।
फिर सूली पर चढ़ना होगा।

जय बोल फावड़ा, जेल, वोट,
जीने खातिर लड़ना होगा।

फिर इंकलाब कहना होगा।
फिर सूली पर चढ़ना होगा।

गर चहिए ज़िन्दा संविधान,
हंसता लेबर, हंसता किसान,
रजिया, रधिया को मुक्ति, मान,
तो नाथू राम की गोली से,
कुछ लालों को मरना होगा।

जय बोल फावड़ा, जेल, वोट,
जीने खातिर लड़ना होगा।

फिर इंकलाब कहना होगा।
फिर सूली पर चढ़ना होगा।

आदेश है उनका गर्द पढ़ो,
तुम जज लोया का फर्द पढ़ो,
संजीव भट्ट का दर्द पढ़ो,
पढ़कर कफ़ील पर गिरा बज्र,
हर सच को फिर पढ़ना होगा।

जय बोल फावड़ा,जेल, वोट,
जीने खातिर लड़ना होगा।

फिर इंकलाब कहना होगा।
फिर सूली पर चढ़ना होगा।

बागों में सूखे गजरे हैं,
गांवों में भूखे मजरे हैं,
साहब की रेल पे नजरें हैं,
भारत की रेल बचाने को,
थोड़ा सबको बढ़ना होगा।

जय बोल फावड़ा, जेल, वोट,
जीने खातिर लड़ना होगा।

फिर इंकलाब कहना होगा।
फिर सूली पर चढ़ना होगा।

यह फूल नहीं है चाकू है,
कोरोना किट का डाकू है,
पहचानों इसे हलाकू है,
ज़र लूट चुका, पर लूट चुका,
चुप रहे तो फिर लुटना होगा।

जय बोल फावड़ा, जेल, वोट,
जीने खातिर लड़ना होगा।

फिर इंकलाब कहना होगा।
फिर सूली पर चढ़ना होगा।

बेकारी दिया जवानी को,
पूंजी दे मित्र अडानी को,
माल्या, मेहुल, अम्बानी को,
इन सबसे देश छुड़ाने को,
फिर जेलों में रहना होगा।

जय बोल फावड़ा, जेल, वोट,
जीने खातिर लड़ना होगा।

फिर इंकलाब कहना होगा।
फिर सूली पर चढ़ना होगा।

धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव
सम्पादक
राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर सन्सद में दो टूक
लोकबन्धु राजनारायण विचार पथ एक
अभी उम्मीद ज़िन्दा है

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