September 25, 2020

जगो साथियों ! नहीं तो अब अन्नदाता बन्धक हो जाएगा

जगो साथियों
——————-

जगो साथियों नहीं तो अब,
अन्नदाता बन्धक हो जाएगा।
सबको घर पहुँचाने वाला,
रस्ता खन्दक हो जाएगा।

जैसे अब रहबर का मतलब,
पूँजी के घर सेवा है।
जैसे अब जनसेवा मतलब,
अपने खातिर मेवा है।

वैसे ही खेती का मतलब,
पूँजी की चरवाही होगी,
चरवाहों के हिस्से केवल,
खेत का कन्टक हो जाएगा।

जगो साथियों नहीं तो अब,
अन्नदाता बन्धक हो जाएगा।

धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *