September 18, 2021

केवल तुम्हारा ज़िंदाबाद बोलने के लिए

केवल तुम्हारा
ज़िंदाबाद बोलने
के लिए
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ऐ देश
घबराना नहीं
अभी वह
लालकृष्ण आडवाणी
ज़िन्दा है
जिसने
1975 के
आगमन का बोध
2015 – 16 में ही
करा दिया था।

अभी
भारत की
सरकार में
वह नीतिन गडकरी
ज़िन्दा है
जो सच
स्वीकार करता है
कि सरकार का हाथ
जहाँ कहीं
जाता है
सत्यानाश
हो जाता है।

अभी
जल विनाश
के विरोध में
जूझ रहीं
मेधा पाटेकर की
सांसेें
चल रही हैं
अभी
यमुना प्रसाद बोस
सगीर अहमद
राजकुमार जैन
आनन्द कुमार
रामगोविन्द चौधरी
राजनाथ शर्मा
सुभाषनी अली
रमेश दीक्षित
रमाशंकर सिंह
सुनीलम
कुर्बान अली
रामकिशोर
शाहनवाज अहमद कादरी
डॉक्टर शकील मोईन
अनिल त्रिपाठी
विजय यादव देवव्रत
डॉक्टर अरमान अली
जैसे साथी
अपनी अपनी
थाती

लेकर अपने अपने
मोर्चे पर
डटे हैं।

ऐ देश
अभी
कुमार प्रशांत
के खिलाफ
उड़ीसा में हुई
एफ आई आर
बता रही है
कि राजघाट
ज़िन्दा है।

ऐ देश
जिसे पाने को
लोग
कमर से
घोड़े
खोल देते हैं
उसे
ठुकरा कर
गोपीनाथान ने
बता दिया
कि विलासी
जीवन से
अधिक जरूरी है
जुबान पर
ताले का
प्रतिवाद
झूठ और जुल्म का
मुर्दाबाद।

ऐ देश
यह प्रतिवाद
जब
विंध्यवासनी कुमार
हो जाता है
नदी के किनारे
एक पौधा
रोप आता है
और जब
कस्तूरी लाल तागरा
हो जाता है
तो कलम लेकर
निकल पड़ता है
एक नए रास्ते की
आस में
किसी कस्तूरी की
तलाश में।

ऐ देश
यह प्रतिवाद
जब
यशवंत सिंह
हो जाता है
चिल्लाता है
चीन का सामान
भारत का
अपमान
और जब
ओमप्रकाश
हो जाता है
तो चिल्लाता है
हे ! राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर
कोई रास्ता बताओ।

ऐ देश
यह प्रतिवाद ही है
जो तुम्हारे
एकतरफा प्यार में
आज भी
सिर पर
लाल कफ़न
बांधकर
चिल्ला रहा है
नया सबेरा
आएगा
लूटने वाला
जाएगा।

ऐ देश
अभी भी
तुम्हारी
गोद में
खेल रहे
बड़ी तादाद में
ऐसे लोग हैं
जो चाहते तो
युधिष्ठर को हैं
लेकिन
लड़ रहे हैं
दुर्योधन की
ओर से
कोई अपनी
वचनबद्धता
को लेकर
कोई
रक्त की
शुद्धता
को लेकर।

ऐ देश
इन्हीं लोगों की
कतार का
एक अंतिम आदमी
मैं भी हूँ
जो आज
2 सिम्बर 2019
के दिन भी
राजघाट के
पेड़ पौधों में
नया जीवन
तलाश रहा हूँ
लोकबन्धु राजनारायण के
1978 वध
और
राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर की
मैराथन
पदयात्रा की
पीड़ा बाँच रहा हूँ
तुम्हारे हाथों
और पैरों में
पड़ी
सौ दो सौ
देशी विदेशी
धनपशुओं की
जंजीर
तोड़ने के लिए
केवल
केवल
केवल
तुम्हारा ज़िंदाबाद
बोलने के लिए।

धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव
सम्पादक
राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर – सन्सद में दो टूक
लोकबन्धु राजनारायण – विचार पथ एक
अभी उम्मीद ज़िन्दा है

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