August 31, 2019

ऐ हिमालय ! हम तेरे अपमान को भूले नहीं हैं

ऐ हिमालय !
हम तेरे अपमान को
भूले नहीं हैं
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ऐ हिमालय ! हम तेरे अपमान को भूले नहीं हैं।
जो किया धोखा है उस शैतान को भूले नहीं हैं।

कुछ तो हैं मजबूरियां कुछ अपनी सीमाएं हैं पर,
तेरी चोटी पर हुए बलिदान को भूले नहीं हैं।

जबतलक ना मुक्त होगा तूँ नहीं बोलेंगे उससे,
हम सभी सन्सद के इस अरमान को भूले नहीं है।

कौन क्या कहता है इससे है नहीं मतलब कोई,
हम कहेंगे कि अभी बेईमान को भूले नहीं हैं।

वह नहीं भूला है तिब्बत की जमीं तो जान ले वह,
हम भी शिव कैलाश के सीवान को भूले नहीं हैं।

जबतलक वापस न होगा चीन भारत की जमीं से,
हम भी बायकाट के एलान को भूले नहीं हैं।

उसके सामानों को तजकर साथियों बतलाओ हम,
थोड़ा सस्ता के लिए सम्मान को भूले नहीं हैं।

धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव
सम्पादक
राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर – सन्सद में दो टूक
लोकबन्धु राजनारायण – विचार पथ एक
अभी उम्मीद ज़िन्दा है

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