August 28, 2020

अपना खत फुटपाथ पर रख दे

अपना खत फुटपाथ पर
रख दे मुझे मिल जाएगा
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रेजा रेजा दिख रहा दामन खुदी सिल जाएगा।
तूँ दुआ कर दे तो पत्थर पर कमल खिल जाएगा।

पूछकर मेरा पता मत मोल तूँ रुसवाइयाँ ले,
अपना खत फुटपाथ पर रख दे मुझे मिल जाएगा।

तेरी नेमत पर हमें हैं आज भी इतना यकीन,
हम अगर मांगे तो सूखा पेड़ भी फल जाएगा।

थोड़ा दाना और पानी छत पे खुल्ला छोड़ दे,
एक परिन्दा रोज की इस छूट से पल जाएगा।

आ सजाएं गांव घर में फिर अदब की महफिलें हम,
बर्फ के मानिन्द तासुब्ब का जहर गल जाएगा।

मुठ्ठियों को बाँध और ईमान की जय बोलकर उठ,
जुल्म का तख्ता भी जिन्दाबाद से हिल जाएगा।

तुम मोहब्‍बत का दिया दिल में जला के देख लो,
जो मिलेगा तुमसे तेरे रंग में ढल जाएगा।

अपने दीवानों की आहट जानता है मयकदा,
प्यार से आओ इधर तो खुद-बखुद खुल जाएगा।

रोकिए हिंसक दिमागी भीड़ को जल्दी नहीं तो,
भीड़ के हाथों से दरपन देश का जल जाएगा।

धीरेंद्र नाथ श्रीवास्‍तव
सम्पादक
राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर – सन्सद में दो टूक
अभी उम्मीद ज़िन्दा है

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