September 18, 2021

लोकबन्धु को जनता पार्टी से निकाला गया साजिश के तहत

रिज की घटना नहीं घटती तो भी राजनारायण निकाले जाते-शान्ता कुमार

समाजवादी आंदोलन के योद्धा लोकबन्धु राजनारायण के साथ कदम दर कदम चलने वाले डाक्टर राजकुमार जैन ने 2 सितम्बर 2019 सोमवार को इण्डियन काफी हाउस में ब्लेक काफी के साथ मुझे दो महत्वपूर्ण दस्तावेज दिए। समाजवादी चिंतक किशन पटनायक के घराने के जुझारू सदस्य डाक्टर अरमान अली ने दिया एक पुस्तक, राजनीति के शतरंज जिसे लिखा है हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे शान्ता कुमार ने।

दस्तावेज 1- जनता पार्टी की अनुशासन समिति की वह कार्यवाही जिसमें लोकबन्धु के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है जो 18 पृष्ठ की है जिसमें 17 पृष्ठ सुरक्षित हैं। लोकबन्धु राजनारायण को अनुशासन के नाम पर निकलने के लिए हुई इस 18 पृष्ठि कार्यवाही की तारीख है-12 जून 1979।
यह वह दस्तावेज है जिसमें लोकबन्धु को उस जनता पार्टी की सदस्यता से वंचित करने का निर्णय है जिसके निर्माण की हर ईंट पर राजनारायण की अंगुलियों के निशान हैं।

दस्तावेज 2- शिमला के रिज मैदान में धारा 144 तोड़ने के मामले की पुलिस की कार्यवाही जिसमें कौन कौन गिरफ्तार हुए, क्यों गिरफ्तार हुए आदि की चर्चा है, तारीख है, 25 जून 1979।
याद रहे कि इसी रिज मैदान में लोकबन्धु 25 जून 1978 को सभा की थी। राज्य सरकार ने सभा की अनुमति नहीं दी थी।

आश्चर्यजनक यह है कि जिस जनता पार्टी की सरकार में लोकबन्धु राजनारायण केंद्र में मंत्री थे, उसी पार्टी की हिमाचल प्रदेश में सरकार थी लेकिन अनुमति नहीं दी, लेकिन लोकबन्धु ने सभा की । इसे अनुशासनहीनता मान कर प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने 29 जून को लोकबन्धु राजनारायण से इस्तीफा मांगा और 30 जून 1978 को लोकबन्धु ने उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया।

रिज की घटना के एक साल पूरा होने युवा जनता ने 25 जून 1979 को रिज मैदान में युवा जनता ने फिर सभा की। दूसरे दस्तावेज में इस अवसर पर हुई सभा और गिरफ्तारी की कार्यवाही है।

क्या कहा जाए, 1975 में जिस 12 जून की तारीख को लोकबन्धु राजनारायण की याचिका पर इलाहाबाद उच्चन्यायालय के न्यायमूर्ति श्री जगमोहन लाल ने फैसला सुनाया, जिसमें प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का चुनाव अवैध घोषित हुआ जिसकी वजह से देश में राजनीतिक भूचाल आया, चार वर्ष बाद उसी 12 जून को लोकबन्धु को उस जनता पार्टी से निकालने की कार्रवाई हुई जिसके निर्माण की हर ईंट पर लोकबन्धु की अंगुलियों के निशान हैं।

उसी प्रकार शिमला धरना प्रदर्शन की तारीख वही 25 जून है, जो चार वर्ष पूर्व से यानी 1975 से देश पर आपातकाल थोपने के लिए जानी जाती है जिसे थोपने वाली श्रीमती इंदिरा गांधी को लोकबन्धु ने इस धरना प्रदर्शन के मामले से दो साल पहले 1977 में जनता के बीच भी हराया और 1975 को उच्चन्यायालय में हराया था।

हिमाचल प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शान्ता कुमार एक पुस्तक है, राजनीति के शतरंज।
इस पुस्तक का एक वाक्य शब्दसः,” मेरा यह विश्वास है कि रिज की घटना नहीं घटी होती तो भी जिस रास्ते पर राजनारायण कुछ दिनों से चल रहे थे, वे वहीं पहुंचते जहां रिज की घटना के बाद पहुंचे।”

इन दस्तावेजों, राजनीति के शतरंज को पढ़ने और इन घटनाओं के चश्मदीद पूर्व मंत्री श्री सत्यदेव त्रिपाठी और लोकबन्धु के हर कदम से कदम मिलाकर चलने वाले डाक्टर राजकुमार जैन की माने तो लोकबन्धु राजनारायण का जनता पार्टी से निष्कासन एक सोची समझी साजिश का हिस्सा था।

धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव
सम्पादक
राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर – सन्सद में दो टूक
लोकबन्धु राजनारायण – विचार पथ एक
अभी उम्मीद ज़िन्दा है

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