August 3, 2021

उठो साथियों ! आओ मिलकर, एक साथ श्रम की जय बोलें

उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक साथ श्रम की जय बोलें
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साथियों, 23 नवम्बर को लोकबन्धु राजनारायण की 103 वीं जयन्ती है। आप जानते हैं कि लोकबन्धु राजनारायण का जन्म 1917 में अक्षय नवमी को हुआ था। उस दिन तारीख थी 23 नवम्बर।
लोकबन्धु राजनारायण जयन्ती के 103 वें वर्ष में इस बार 23 नवम्बर को ही अक्षय नवमी भी पड़ रही है। आइए ! इस संयोग का स्वागत करें।अक्षय नवमी यानी 23 नवम्बर यानी लोकबन्धु राजनारायण की जयंती पर समाजवादी समाज की स्थापना का संकल्प लें।
इस अवसर पर मेरे मित्र लोकतन्त्र सेनानी, वरिष्ठ पत्रकार, जनकवि धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव की नज़्म,

“उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक साथ श्रम की जय बोलें”

का पाठ भी करें।
रामगोविन्द चौधरी
नेता प्रतिपक्ष, उत्तर प्रदेश।
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उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक साथ श्रम की जय बोलें
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उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक बार उनकी जय बोलें,
जो फुटपाथों पर सोते हैं,
ठेला पर बोझा ढोते हैं,
रिक्शा बन रिक्शा जीते हैं,
जूते पर पालिस करते हैं,
होटल में बरतन धोते हैं,
फिर भी भात देख रोते हैं,
इनके आँसू पोछ न पाएं,
तो इनके इस हाल पे रोलें।
उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक साथ श्रम की जय बोलें।

उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक बार उनकी जय बोलें,
जो सबको उत्थान दे रहे,
हर मशीन में प्राण दे रहे,
हर करघे को मान दे रहे,
सूत को भी सम्मान दे रहे,
सबको ईंट मकान दे रहे,
नंगे भूखे जान दे रहे,
इनको रोटी कपड़ा चहिए,
कम से कम इतना तो बोलें।
उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक साथ श्रम की जय बोलें।

उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक बार उनकी जय बोलें,
जो खेतों में अन्न उगाने,
सब्जी और साग उपजाने,
फूल फलों से बाग सजाने,
दूध गार बलटा तक लाने,
में अपना जीवन देते हैं,
फिर भी ये भूखे सोते हैं,
इनकी भूख मिटाने खातिर,
राज पाठ पर हल्ला बोलें।
उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक साथ श्रम की जय बोलें।

उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक बार उनकी जय बोलें,
जिनके लिए गीत रोटी है,
जिनके लिए प्रीत रोटी है,
जिनके लिए मीत रोटी है,
जिनके लिए जीत रोटी है,
इनकी रोटी, छीन रहे जो,
हाथ उठा उनकी छय बोलें।
उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक साथ श्रम की जय बोलें।

उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक बार उनकी जय बोले,
जिनके लिए मरम रोटी है,
जिनके लिए करम रोटी है,
जिनके लिए कलम रोटी है
जिनके लिए धरम रोटी है,
बिकती जहां शरम रोटी पर,
उनके लिए भी रोटी बोलें।
उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक साथ श्रम की जय बोलें।

उठो साथियों ! एक बार बस,
केवल भूखों की जय बोलें,
जो बापू के अनुयाई हों,
जो जेपी के अनुयाई हों,
जो लोहिया के अनुयाई हों,
श्री चन्द्रशेखर, राजनारायण,
कर्पूरी जी के भाई हों,
वह इस भूख का दर्द समझकर,
रोज भूख की क्षय क्षय बोलें।
समाजवाद की जय जय बोलें।
उठो साथियों ! आओ मिलकर,
एक साथ श्रम की जय बोलें।

धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव
सम्पादक
राष्ट्रपुरुष चन्द्रशेखर – सन्सद में दो टूक
लोकबन्धु राजनारायण – विचार पथ एक
अभी उम्मीद ज़िन्दा है

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