October 26, 2021

आज दुःशासन होता तो शर्मा जाता

देख सड़क पर चीरहरण पगला जाता।
आज दुःशासन होता तो शर्मा जाता।

ट्वीटर पर उलझे हैं अर्जुन, भीम सभी,
उसे जरूरत कोई उसे बचा जाता।

कट्टा गोली बरसे वर्दी नाँक तले,
गर होता कानून निरख छितरा जाता।

लोकतन्त्र के लिए लोक की लख हत्या,
तन्त्र अगर जीवित होता टकरा जाता।

कलमकार पर हमला लखकर सड़कों पर,
शासन गर होता बचाव में आ जाता।

खुश हैं दोनों तरफ के गुण्डे और पशु,
अच्छों की चुप्पी लख हृदय फटा जाता।

सत्यमेव जयते से है उम्मीद बची,
कोई उसको उसका फर्ज बता जाता।

धीरु भाई ( धीरेन्द्र नाथ श्रीवास्तव )
दो टूक – 9 जुलाई 2021,

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